हिन्दू पंचांग के अनुसार शक्तिस्वरूपा देवी ललिता को समर्पित ललिता पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में होनेवाले नवरात्री के पांचवे दिन मनाया जाता हैं. इस सुअवसर पर भक्तगण व्रत रखते हैं जो कि ललिता पंचमी व्रत के नाम से जाना जाता है. यह पर्व गुजरात और महाराष्ट्र के साथ साथ लगभग पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यतानुसार इस दिन देवी ललिता भांडा नामक राक्षस को मारने के लिए प्रकट हुई थी, जो कि कामदेव के शरीर के राख से उत्पन्न हुआ था.
इस दिन भक्तगण षोडषोपचार विधि से मां ललिता का पूजन करते है. इस दिन मां ललिता के साथ साथ स्कंदमाता और शिव शंकर की भी शास्त्रानुसार पूजा की जाती है. इस दिन का व्रत भक्तजनों के लिए बहुत ही फलदायक होता है.आस्थावान भक्तों में मान्यता है कि यदि कोई इस दिन मां ललिता देवी की पूजा भक्ति-भाव सहित करता है तो उसे देवी मां की कृपा प्राप्त होती है और उसके जीवन में हमेशा सुख शांति एवं समृद्धि रहती है.